शुक्रवार, 4 मई 2007

हसीन कविता


(छायाचित्र सहयोग: सोनल)

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किसी दिवाने कवि की
तुम हसीन कविता हो

इतने सटीक नयन नक्श
कोई होश में रहकर
कैसे बना सकता है?
वो जरूर नशे में रहा होगा.
तुमको बनाने के बाद
उसने खुदसे वाह! कहा होगा.

सादगी से सुबह जैसे
कोई फूल मुस्कुराता हो
किसी दिवाने कवि की
तुम हसीन कविता हो

इतनी सादगी के साथ
दिल को चीरता हुआ
कोई कैसे मुस्का सकता है?
जरूर एक जादूगरनी हो
समा महका जाने वाली
तुम कस्तूरी हिरनी हो

पानी की चाह में जैसे
कोई मलहार गाता हो
किसी दिवाने कवि की
तुम हसीन कविता हो

तुषार जोशी, नागपुर

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी तस्वीरें देखने के लिये आपके ब्लॉग में आने के लोभ से मैं बच नहीं पाता। आपकी कविता की सादगी का तो मैं कायल हूँ ही।

    *** राजीव रंजन प्रसाद

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  2. कविता की सुन्दरता को कविता की सुन्दरता से आपने और भी सुन्दर बना दिया है। आनन्द आ गया! धन्यवाद!

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  3. 'saadagi' ya shabacha khara arth hya kavitetun kalto. surekhch "shabda-chitra" aahe he ! wah !! abhinandan !!!

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  4. B. Vinod Rao, Jagdalpur, Bastar, C.G.
    Maine ajtak itni sadagi bharia mukh nahi dekha tha. Vastavik samanya chehra hai. Jo bhi dekhega barbas hi ek bar to akrshit hue bagair rah na payega. yah tippani na sirf is chhayachitra ke liye balki apki is kavita ke liye bhi lagoo hoti hai. Kyonki apki kavita me pryogit shabd bhi ek samnya pathak ko asani se samazh me ayenge. Asha karta hoon ki shighra hi apki aisi hi ek aur dil ko chhoo lene wali kavita hame padhane ko uplabdha hogi. Is pyari si dil par asar karne wali rachana ke liye apko sadar dhanyawad.

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