मंगलवार, 5 जून 2007

तलाश


Khyati my Neice again, originally uploaded by Tilak Haria.

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मुझे कुछ तलाश है
जो जो होना चाहिये
वो तो मेरे पास है
फिर भी कुछ तलाश है

एक जगह चाहिये जहाँ
सारा प्यार लुटा सकूँ
ऐसा काम के जहाँ
खुदको मैं भुला सकूँ
किसी अंजान मंज़िल की
अंजान सी प्यास है
मुझे कुछ तलाश है

एक कदम उधर जहाँ
दुख अधिक हो सुख हो कम
आसानी से जो ना हो
करते करते निकले दम
घोसले को छोड कर
उडने का प्रयास है
मुझे कुछ तलाश है

तुषार जोशी, नागपुर

6 टिप्‍पणियां:

  1. ऐसा काम के जहाँ
    खुदको मैं भुला सकूँ
    किसी अंजान मंज़िल की
    अंजान सी प्यास है
    मुझे कुछ तलाश है

    एक कदम उधर जहाँ
    दुख अधिक हो सुख हो कम
    आसानी से जो ना हो
    करते करते निकले दम
    घोसले को छोड कर
    उडने का प्रयास है
    मुझे कुछ तलाश है

    ye lines bahot man ko bhaa gayee Tusharji !

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  2. एक कदम उधर जहाँ
    दुख अधिक हो सुख हो कम
    आसानी से जो ना हो
    करते करते निकले दम
    घोसले को छोड कर
    उडने का प्रयास है
    मुझे कुछ तलाश है

    एक बार फिर आपकी सशक्त और संवेदनशील रचना।

    *** राजीव रंजन प्रसाद

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  3. एक जगह चाहिये जहाँ
    सारा प्यार लुटा सकूँ
    ऐसा काम के जहाँ
    खुदको मैं भुला सकूँ
    किसी अंजान मंज़िल की
    अंजान सी प्यास है
    मुझे कुछ तलाश है


    बहुत ख़ूब तुषार जी
    सच में एक तलाश सबको है ..
    हर कोई कुछ ना कुछ तलाश कर रहा है
    बहुत सुंदर भाव में बँधा है आपने लफ़्ज़ो को...

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  4. तुषार जी,

    जिन्दगी खुद में इक तलाश है... बाद में त हट जाता है और लाश रह जाती है....
    आदमी जितना पाता जाता है यह "त" उतना ही लम्बा होता जाता है... न जाने इस "त" से पूरा शब्द क्या बनता है
    शायद तमन्ना, तक्दीर, तदबीर या कुछ और...आप बताये
    लगता है मै कुछ ज्यादा ही फ़िलोसिफ़िकल हो गया

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  5. @स्वना जी, @राजीव जी, @रंजू जी
    प्रोत्साहन के लिये शुक्रिया

    @मोहिन्दर जी
    आपने तो बहोत कुछ कह दिया अब मैं उस पर सोच रहा हूँ।

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