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तुमने अभी अभी
मन लगाकर पढ़ डाला
वो मेरा चेहरा था
तुमने तो चुटकी में
जिसको हल कर डाला
राज़ कितना गहरा था
मै तो कितनी सदियों से
तुमको पढ़ना चाहता हूँ
लेकिन पढ़ ना पाया
तुमने तो मेरे ही
दिल का हर एक जर्रा
मुझको कहके दिखलाया
तुषार जोशी, नागपूर
प्रेषक:
Tushar Joshi, Nagpur
समय:
11:20 अपराह्न
2 प्रतिक्रिया:
"तुमने तो मेरे ही
दिल का हर एक जर्रा
मुझको कहके दिखलाया"
वाह, क्या सशक्त वाक्य है! कविता भावना से भरी हुई है. लिखते रहें!!
tum jo abhi padha mera chera tha,chutki mein khola wo raaz kitna gehra tha,khubsurat lafz.
khup chan chan kavita jhali aahe baraka.phto pan khup chan aahe.
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