मंगलवार, 26 अक्तूबर 2010

लगे जैसे मिली मंझिल

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(छायाचित्र सहयोग: पूजा )
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तुम्हारी वो हँसी देखी वहीं पर खो चुके हम दिल
तुम्हारा पास यूँ होना लगे जैसे मिली मंझिल

कहा से लाये हो तुम सादगी का ये हँसी गहना
तुम्हे देखा तो दिल सोचे सलोनी तुम परी हो ना?
तुम्हारी चाँदनी से हो हमारी राह भी झिलमिल
तुम्हारा पास यूँ होना लगे जैसे मिली मंझिल

लटें जब आती है माथें पे जादू करती है कितना
शरारत से भरी आँखे कहर ये ढाती है कितना
सम्हाले कैसे खुदको हैं अभी ईतने नहीं काबिल
तुम्हारा पास यूँ होना लगे जैसे मिली मंझिल

तुषार जोशी, नागपूर
२६ अक्तुबर २०१०, २२:००
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5 टिप्‍पणियां:

  1. हर शब्‍द में गहराई, बहुत ही बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

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  2. कोठून आला रम्य हा साधेपणा हास्यातला
    पाहून वाटे की परीचा लाभला ठेवा तुला
    तू चंद्रिका मार्गात माझ्या हा दिलासा लाभला
    आता तुझे सामीप्य लाभे, शोध सारा संपला..

    माथ्यावरी येता बटा जादू तयांची भासते
    खोड्याळ डोळे झाक तू हे, त्यातुनी का हासते
    ताबा नसे माझ्यावरी माझा, कधी का शक्य ते ?
    आता तुझे सामीप्य लाभे, जिंकलो मी वाटते...

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  3. धन्यवाद स्वामीजी, फटाफट मराठी भाषांतर बनाकर आपने तो कमाल कर दिया।

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  4. संजय जी, विवेक जी, प्रोत्साहित करने के लिये धन्यवाद।

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