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हँसी है तुम्हारी जैसे बरखा की झडी
होठों पे चमके देखो मोतीयों की लडी
खुशी छलकाती आँखें खिलाखिला ये चेहरा
भर देता है मौसम में रंग हरा और गहरा
लगता है आसमानी परी सामने खडी
होठों पे चमके देखो मोतीयों की लडी
सुंदरता सादगी है हँसी तुम्हारा गहना
जीवनभर इसी तऱ्हा तुम खुशी बाँटते रहना
तुम जब हो पास वो है बड़ी सुहानी घडी
होठों पे चमके देखो मोतीयों की लडी
तुषार जोशी, नागपूर
१० सितंबर २०१२, ११:४५















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किसी दिवाने कवि की
तुम हसीन कविता हो
इतने सटीक नयन नक्श
कोई होश में रहकर
कैसे बना सकता है?
वो जरूर नशे में रहा होगा.
तुमको बनाने के बाद
उसने खुदसे वाह! कहा होगा.
सादगी से सुबह जैसे
कोई फूल मुस्कुराता हो
किसी दिवाने कवि की
तुम हसीन कविता हो
इतनी सादगी के साथ
दिल को चीरता हुआ
कोई कैसे मुस्का सकता है?
जरूर एक जादूगरनी हो
समा महका जाने वाली
तुम कस्तूरी हिरनी हो
पानी की चाह में जैसे
कोई मलहार गाता हो
किसी दिवाने कवि की
तुम हसीन कविता हो
तुषार जोशी, नागपुर