तुम हस दिये तो
सब सवाल धुल गये
क्यो खिली बहार?
सब जवाब मिल गये
तुम हस दिये तो
दिल नाचने लगा
जिन्दगी हसीन है
मन सोचने लगा
तुम हस दिये तो
दिन गया महक
खुश हुआ मैं यूँ
जैसे गुड मिला बालक
तुषार जोशी, नागपुर
ईस चिठ्ठे पर लिखी कविताएँ तुषार जोशी, नागपूर ने साथ मेँ लगी तस्वीर को देखकर पहले दस मिनट में लिखीँ है। मगर फिर भी लेखक के संदर्भ, पूर्वानुभव और कल्पनाएँ उनमे उतर ही आती है। छायाचित्र सहयोग के लिये सभी छायाचित्र प्रदानकर्ताओं का दिल से धन्यवाद।
मंगलवार, 1 मई 2007
तुम हस दिये तो
सागर सी आखें
सागर सी आखें करती है
दिल को दिवाना
आंखो में भी नशा होता है
देख के है जाना
सुंदरता की परिभाषा को
बदल दिया तुमने
कैसे बताएँ सबको के क्या
देख लिया हमने
तुषार जोशी, नागपुर
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